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48 Laws of Power by Robert Greene | Summary in Hindi | पुस्तक का सारांश

By admin
Last updated: 08/21/2025
21 Min Read
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सन 1502 की सर्द रात। इटली के सेनिगालिया शहर के एक महल में, सीज़र बोरगिया, जो पोप के बेटे और एक निर्दयी योद्धा थे, ने अपने विद्रोही कप्तानों को शांति वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। कप्तानों को लगा कि वे जीत गए हैं। उन्होंने सीज़र के खिलाफ साजिश रची थी, और अब वह सुलह के लिए गिड़गिड़ा रहा था। वे मुस्कुराते हुए महल में दाखिल हुए, अपनी तलवारें बाहर छोड़ दीं। सीज़र ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, उन्हें गले लगाया।

लेकिन जैसे ही वे बैठक कक्ष में बैठे, दरवाजा बंद हो गया। सीज़र के वफादार सैनिक छाया से निकले। कप्तानों की मुस्कान दहशत में बदल गई। सीज़र, जो कुछ पल पहले एक दयालु मेजबान लग रहा था, अब उसकी आँखों में बर्फीली ठंडक थी। उसने शांति से कहा, “जो लोग तलवार से जीते हैं, वे तलवार से ही मरते हैं।” उस रात, सभी विद्रोही कप्तानों का गला घोंट दिया गया।

यह कहानी “48 Laws of Power” की आत्मा है। यह किताब आपको बताती है कि शक्ति का खेल मीठी बातों और अच्छी भावनाओं पर नहीं खेला जाता। यह एक क्रूर, रणनीतिक और अक्सर छिपा हुआ युद्ध है। यह आपको सिखाएगी कि कैसे धोखे को पहचानें, अपनी रक्षा करें, और जब आवश्यक हो, तो अपने दुश्मनों को मात देने के लिए खुद एक चतुर रणनीतिकार बनें। यह किताब नैतिक नहीं है, यह वास्तविक है। यह आपको वह दुनिया दिखाती है जो है, न कि वह जो होनी चाहिए। क्या आप इस खतरनाक ज्ञान के लिए तैयार हैं?

2. एक नज़र में (At a Glance Box)

  • पुस्तक का नाम: 48 Laws of Power
  • लेखक: Robert Greene
  • प्रकाशन का वर्ष: 1998
  • शैली: रणनीति, मनोविज्ञान, इतिहास, स्वयं सहायता
  • मुख्य विषय: शक्ति प्राप्त करने, बनाए रखने और बचाव करने के 48 कालातीत नियम, जो ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से समझाए गए हैं।

3. लेखक की यात्रा – एक व्यक्तिगत कहानी

रॉबर्ट ग्रीन की कहानी उस दिन शुरू होती है जब उन्हें हॉलीवुड में एक और नौकरी से निकाल दिया गया था। उन्होंने 80 से अधिक विभिन्न नौकरियाँ की थीं – कंस्ट्रक्शन वर्कर से लेकर पत्रिका संपादक तक – और हर जगह उन्होंने एक ही पैटर्न देखा: लोग अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए सूक्ष्म खेल खेलते थे। वे अक्सर सबसे प्रतिभाशाली या मेहनती नहीं थे जो आगे बढ़ते थे, बल्कि सबसे चतुर।

ग्रीन इतिहास के प्रति जुनूनी थे। उन्होंने देखा कि जूलियस सीज़र से लेकर माओत्से तुंग तक, महान नेताओं ने समान रणनीतियों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने महसूस किया कि शक्ति के नियम समय के साथ नहीं बदलते। “[शक्ति] एक खेल है,” उन्होंने बाद में लिखा, “और यह खेल हमेशा खेला जाता रहा है।”

इटली में काम करते हुए, उन्होंने अपनी टिप्पणियों को एक पुस्तक में बदलने का फैसला किया। उन्होंने “The Prince” के लेखक मैकियावेली की तरह बनने का सपना देखा – एक ऐसा व्यक्ति जो शक्ति की क्रूर सच्चाइयों को उजागर करने से नहीं डरता। “48 Laws of Power” उस सपने का परिणाम है। यह केवल एक किताब नहीं है; यह ग्रीन के जीवन भर के अवलोकन और अध्ययन का सार है, जो हमें उस छिपे हुए खेल को समझने में मदद करने के लिए लिखा गया है जिसे हम सभी हर दिन खेलते हैं।

4. पुस्तक की यात्रा का नक्शा

“48 Laws of Power” एक खतरनाक जंगल के माध्यम से एक गाइड की तरह है। प्रत्येक “कानून” एक अलग रास्ते को रोशन करता है, जो आपको घात, जाल और छिपे हुए दुश्मनों से बचने में मदद करता है।

  • प्रस्थान बिंदु: आप एक भोले-भाले व्यक्ति के रूप में शुरू करते हैं जो मानता है कि कड़ी मेहनत और ईमानदारी ही सफलता की कुंजी है।
  • मार्ग के पड़ाव: जैसे-जैसे आप कानूनों के माध्यम से यात्रा करते हैं, आप सीखते हैं कि कैसे अपने स्वामी से आगे न बढ़ें (कानून 1), कैसे दूसरों से काम करवाएं और श्रेय खुद लें (कानून 7), और कैसे लोगों को अपने ऊपर निर्भर बनाएं (कानून 11)।
  • मंज़िल: यात्रा के अंत तक, आप एक रणनीतिक विचारक बन जाते हैं। आप अब दुनिया को वैसे नहीं देखते जैसे वह दिखती है, बल्कि वैसे देखते हैं जैसे वह वास्तव में है। आप शक्ति की गतिशीलता को समझते हैं और अपने भाग्य को नियंत्रित करने के लिए सुसज्जित हैं।

5. मुख्य विचारों की गहरी गोताखोरी

सिद्धांत 1: कानून 1 – कभी भी अपने स्वामी से आगे न बढ़ें (Never Outshine the Master)

कहानी की शुरुआत: 17वीं सदी के फ्रांस में, निकोलस फौक्वेट, राजा लुई XIV के वित्त मंत्री थे। वह प्रतिभाशाली, महत्वाकांक्षी और बेहद अमीर थे। अपनी शक्ति और धन का प्रदर्शन करने के लिए, उन्होंने एक शानदार महल, वॉक्स-ले-विकॉम्ते का निर्माण किया। 1661 में, उन्होंने महल के उद्घाटन के लिए एक भव्य पार्टी दी, जिसमें राजा को भी आमंत्रित किया गया। पार्टी इतनी शानदार थी कि इसने राजा के अपने महलों को भी फीका कर दिया। मेहमान फौक्वेट की प्रशंसा कर रहे थे। लेकिन लुई XIV चुपचाप सब कुछ देख रहे थे। उनकी मुस्कान के पीछे ईर्ष्या की आग जल रही थी। फौक्वेट ने सोचा था कि वह राजा को प्रभावित कर रहा है, लेकिन वास्तव में वह उसे अपनी भव्यता से अपमानित कर रहा था। कुछ हफ्तों बाद, लुई XIV ने फौक्वेट को गबन के आरोप में गिरफ्तार करवा लिया और उसे जीवन भर के लिए जेल में डाल दिया। फिर, लुई ने उन्हीं कलाकारों और वास्तुकारों को काम पर रखा जिन्होंने फौक्वेट के महल का निर्माण किया था, और उनसे वर्साय का महल बनाने के लिए कहा – एक ऐसा महल जो फौक्वेट के महल से कहीं अधिक भव्य होगा।

सिद्धांत की आत्मा: आपके ऊपर जो लोग हैं, वे अपनी स्थिति में सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं। यदि आप अपनी प्रतिभा का बहुत अधिक प्रदर्शन करते हैं, तो आप उन्हें असुरक्षित महसूस कराते हैं। वे आपसे डरने लगते हैं, और यह डर ईर्ष्या और अंततः घृणा में बदल जाता है। अपने स्वामी को हमेशा यह महसूस कराएं कि वे आपसे अधिक प्रतिभाशाली और बुद्धिमान हैं। अपनी सफलताओं का श्रेय उन्हें दें। ऐसा करने से, आप उन्हें अपना सहयोगी बना लेंगे, दुश्मन नहीं।

भारतीय दर्पण कथा: महाभारत में, द्रोणाचार्य ने अपने शिष्य अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाया। लेकिन जब एकलव्य, एक आदिवासी लड़का, केवल उनकी मूर्ति से सीखकर अर्जुन से भी बेहतर धनुर्धर बन गया, तो द्रोणाचार्य को खतरा महसूस हुआ। उन्होंने एकलव्य से गुरु दक्षिणा के रूप में उसका अंगूठा मांग लिया, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी अर्जुन से आगे न निकल सके। यह कहानी दिखाती है कि एक गुरु भी अपने शिष्य की श्रेष्ठता से असुरक्षित महसूस कर सकता है।

आपकी कहानी का पन्ना: अगली बार जब आप अपने बॉस के साथ किसी मीटिंग में हों, और आपके पास एक शानदार आईडिया हो, तो उसे सीधे प्रस्तुत करने के बजाय, इसे इस तरह से प्रस्तुत करें जैसे कि यह उनके किसी पुराने सुझाव से प्रेरित था। कहें, “आपने उस दिन जो कहा था, उससे मुझे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा…” देखें कि वे कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

सिद्धांत 2: कानून 3 – अपने इरादों को छिपाएं (Conceal Your Intentions)

कहानी की शुरुआत: 19वीं सदी के महान जादूगर हैरी Houdini अपने भागने के करतबों के लिए प्रसिद्ध थे। वह किसी भी हथकड़ी, किसी भी तिजोरी से बच सकते थे। लेकिन उनका असली रहस्य उनकी शारीरिक शक्ति या निपुणता नहीं थी, बल्कि उनके इरादों को छिपाने की उनकी क्षमता थी। जब वह एक करतब का प्रचार करते, तो वह जनता का ध्यान किसी एक पहलू पर केंद्रित करते – जैसे, “मैं इस पानी से भरे टैंक से बचूंगा।” जबकि असली रहस्य कहीं और छिपा होता – एक विशेष प्रकार की हथकड़ी जिसे उन्होंने खुद डिजाइन किया था, या एक सहयोगी जो उनकी मदद कर रहा था। लोग जो देखते थे, उस पर इतना ध्यान केंद्रित करते थे कि वे जो नहीं देखते थे, उसे कभी नहीं समझ पाते थे।

सिद्धांत की आत्मा: यदि लोग जानते हैं कि आप क्या करने वाले हैं, तो वे आपके खिलाफ बचाव की तैयारी कर सकते हैं। अपने असली इरादों को एक स्मोकस्क्रीन के पीछे छिपाकर, आप उन्हें भ्रमित और संतुलन से बाहर रखते हैं। जब वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे होते हैं कि आप वास्तव में क्या चाहते हैं, तब तक आप अपना लक्ष्य प्राप्त कर चुके होते हैं।

भारतीय दर्पण कथा: छत्रपति शिवाजी महाराज अपने इरादों को छिपाने में माहिर थे। जब उन्होंने अफजल खान से मिलने का फैसला किया, तो उन्होंने ऐसा व्यवहार किया जैसे वे डर गए हैं और आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं। अफजल खान इस धोखे में आ गया और अपनी सुरक्षा कम कर दी। जब वे गले मिले, तो शिवाजी ने अपने छिपे हुए बाघ नख से उसे मार डाला।

आपकी कहानी का पन्ना: यदि आप अपने सहकर्मी से किसी प्रोजेक्ट पर मदद चाहते हैं, तो सीधे मदद मांगने के बजाय, पहले किसी और चीज़ के बारे में बात करें। उनकी राय पूछें, उनकी प्रशंसा करें। जब वे आराम महसूस करें, तो धीरे-धीरे अपनी असली درخواست सामने रखें।

सिद्धांत 3: कानून 9 – शब्दों से नहीं, कर्मों से जीतें (Win Through Your Actions, Never Through Argument)

कहानी की शुरुआत: रोमन जनरल Scipio Africanus पर उनके दुश्मनों ने राजद्रोह का आरोप लगाया। अदालत में, सबूत उनके खिलाफ थे। जब उनकी बारी आई, तो उन्होंने एक लंबा, तर्कपूर्ण भाषण नहीं दिया। इसके बजाय, उन्होंने भीड़ से कहा, “आज ही के दिन, मैंने आपके महान दुश्मन, हैनिबल को हराया था। आइए, हम सब देवताओं को धन्यवाद देने के लिए कैपिटल हिल पर चलें।” भीड़ उनके साथ हो ली, और उनके दुश्मन अकेले और अपमानित रह गए। Scipio ने एक तर्क को एक शक्तिशाली, भावनात्मक कार्य से जीत लिया।

सिद्धांत की आत्मा: तर्क से आप शायद ही किसी को स्थायी रूप से मना सकते हैं। लोग अपने विचारों से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। जब आप उनके विचारों पर हमला करते हैं, तो वे रक्षात्मक हो जाते हैं। एक प्रदर्शन, एक प्रतीकात्मक कार्य, बहुत अधिक शक्तिशाली होता है। यह लोगों को दिखाता है कि आप सही हैं, बिना उन्हें यह बताए।

भारतीय दर्पण कथा: गांधीजी ने दांडी मार्च के माध्यम से ब्रिटिश नमक कानून का विरोध किया। उन्होंने तर्क नहीं दिया; उन्होंने बस नमक बनाया। इस एक सरल कार्य ने पूरे देश को प्रेरित किया और ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।

आपकी कहानी का पन्ना: यदि आपका कोई मित्र धूम्रपान छोड़ना नहीं चाहता है, तो उसे व्याख्यान देने के बजाय, उसे अपने साथ एक लंबी, सुंदर पदयात्रा पर ले जाएं। जब वह हांफने लगे, तो उसे कुछ भी कहने की जरूरत नहीं होगी।

6. पुस्तक पढ़ने की कला (The Art of Reading This Book)

कैसे पढ़ें:

“48 Laws of Power” को एक उपन्यास की तरह न पढ़ें। यह एक दवा की तरह है – एक बार में पूरी बोतल नहीं, धीरे-धीरे खुराक लें। प्रत्येक कानून को एक उपकरण के रूप में देखें। हर दिन एक कानून पढ़ें। फिर, उस दिन अपने आस-पास की दुनिया में उस कानून को काम करते हुए देखने का प्रयास करें – समाचारों में, अपने कार्यालय में, अपने परिवार में। एक डायरी रखें और अपनी टिप्पणियों को लिखें। यह किताब आपको केवल जानकारी नहीं देगी, यह आपके देखने का तरीका बदल देगी।

किसके साथ पढ़ें:

यह किताब अकेले में सबसे अच्छी पढ़ी जाती है। यह एक निजी यात्रा है। दूसरों के साथ इस पर चर्चा करने से बचें, क्योंकि लोग आपको जोड़ तोड़ करने वाला समझ सकते हैं। ज्ञान को अपने भीतर रखें और इसे अपने कार्यों में प्रकट होने दें।

कब पढ़ें:

इसे तब पढ़ें जब आपका मन तेज और विश्लेषणात्मक हो। यह एक ऐसी किताब है जिसके लिए एकाग्रता की आवश्यकता होती है।

7. भारतीय कैनवास पर विदेशी रंग (Indian Context)

चाणक्य की “अर्थशास्त्र” और “चाणक्य नीति” दिखाती है कि शक्ति के नियम भारत में हजारों वर्षों से समझे और अभ्यास किए जाते रहे हैं। रॉबर्ट ग्रीन के कई कानून चाणक्य की शिक्षाओं के आधुनिक संस्करण लगते हैं।

कहानी: धीरूभाई अंबानी ने कानून 15 (“अपने दुश्मन को पूरी तरह से कुचल दें”) का शानदार ढंग से इस्तेमाल किया। जब उन्होंने पॉलिएस्टर का कारोबार शुरू किया, तो स्थापित खिलाड़ियों ने उन्हें बाहर करने की कोशिश की। अंबानी ने कीमतों में इतनी कटौती की कि उनके प्रतिद्वंद्वी दिवालिया हो गए। फिर उन्होंने उनकी मिलें खरीद लीं। उन्होंने कोई दया नहीं दिखाई।

आज के भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में, कानून 6 (“हर कीमत पर ध्यान आकर्षित करें”) सर्वोपरि है। OYO के रितेश अग्रवाल या Zomato के दीपिंदर गोयल जैसे संस्थापक जानते हैं कि एक मजबूत व्यक्तिगत ब्रांड बनाना उनकी कंपनी के लिए कितना महत्वपूर्ण है। वे विवादास्पद बयान देते हैं, मीडिया में रहते हैं, और लगातार ध्यान आकर्षित करते हैं।

8. 30-दिन की रूपांतरण यात्रा (30-Day Transformation)

सप्ताह 1: अवलोकन का सप्ताह

“पहले सात दिन, आप एक जासूस हैं। चुपचाप देखें। अपने कार्यालय की शक्ति गतिशीलता को पहचानें। कौन किसके पक्ष में है? कौन असली बॉस है?”

सप्ताह 2: रक्षा का सप्ताह

“दूसरे सप्ताह में, आप खुद को बचाना सीखते हैं। कानून 1 (अपने स्वामी से आगे न बढ़ें) और कानून 4 (हमेशा जरूरत से कम बोलें) का अभ्यास करें।”

सप्ताह 3: सूक्ष्म आक्रमण का सप्ताह

“तीसरे सप्ताह में, आप छोटे, रणनीतिक कदम उठाते हैं। कानून 12 (अपनी ईमानदारी और उदारता का उपयोग करके अपने शिकार को निरस्त्र करें) का प्रयास करें।”

सप्ताह 4: एकीकरण का सप्ताह

“चौथे सप्ताह तक, आप शक्ति को एक खेल के रूप में देखना शुरू कर देंगे। आप कम भावनात्मक और अधिक रणनीतिक हो जाएंगे।”

9. जब सिद्धांत टकराते हैं (Critical Perspectives)

कहानी A: एक मैनेजर कानून 2 (“दोस्तों पर बहुत अधिक भरोसा न करें, दुश्मनों का उपयोग करना सीखें”) का पालन करता है और अपनी टीम में किसी पर भरोसा नहीं करता है। वह हर किसी को एक उपकरण के रूप में देखता है। नतीजा: उसकी टीम में कोई वफादारी नहीं है, और वे उसे पहले अवसर पर छोड़ देते हैं।

कहानी B: एक अन्य मैनेजर उसी कानून को समझता है, लेकिन वह इसे सूक्ष्मता से लागू करता है। वह अपनी टीम के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखता है, लेकिन वह जानता है कि अंतिम निर्णय उसे ही लेना है। वह अपने प्रतिद्वंद्वियों की प्रतिभा का उपयोग करता है, उन्हें अपनी टीम में शामिल करता है, जहां वह उन पर नजर रख सकता है।

निष्कर्ष: ये कानून पत्थर की लकीर नहीं हैं। वे संदर्भ पर निर्भर करते हैं। उन्हें बिना सोचे-समझे लागू करना विनाशकारी हो सकता है। ज्ञान और विवेक महत्वपूर्ण हैं।

10. जिज्ञासु मन के सवाल (FAQs)

प्रश्न: “क्या यह किताब अनैतिक नहीं है?”

उत्तर: “यह किताब नैतिकता के बारे में नहीं है, यह शक्ति के बारे में है। जैसे, एक मेडिकल छात्र जो शरीर रचना विज्ञान का अध्ययन करता है, वह हत्यारा बनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन बचाने के लिए ऐसा करता है। इसी तरह, शक्ति के नियमों को समझना आपको एक अत्याचारी नहीं बनाता है; यह आपको अत्याचारियों से बचाता है।”

प्रश्न: “क्या मैं इन कानूनों का उपयोग अच्छे के लिए कर सकता हूं?”

उत्तर: “बिल्कुल। मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कानून 27 (‘एक पंथ जैसा अनुसरण बनाने के लिए लोगों की विश्वास करने की आवश्यकता पर खेलें’) का उपयोग नागरिक अधिकार आंदोलन के लिए किया था। उन्होंने लोगों को आशा और एक साझा पहचान दी।”

11. समापन – आपकी कहानी शुरू होती है

“48 Laws of Power” पढ़ना एक खतरनाक यात्रा पर जाने जैसा है। यह आपको मानव स्वभाव के अंधेरे पक्ष को दिखाएगा – ईर्ष्या, लालच, और शक्ति की अंतहीन भूख। यह आपको असहज कर सकता है। यह आपको उन लोगों पर संदेह करने पर मजबूर कर सकता है जिन पर आप भरोसा करते हैं।

लेकिन यह आपको एक अमूल्य उपहार भी देगा: स्पष्टता। आप अब दुनिया को एक भोले-भाले बच्चे की तरह नहीं देखेंगे। आप एक रणनीतिकार की तरह देखेंगे, जो खेल के नियमों को समझता है। यह ज्ञान आपको नियंत्रित करने की कोशिश करने वालों से आपकी रक्षा करेगा, और आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की शक्ति देगा।

आपकी कहानी अब शुरू होती है। आप या तो एक मोहरा बने रह सकते हैं, जिसे दूसरे अपनी इच्छानुसार घुमाते हैं, या आप एक खिलाड़ी बन सकते हैं, जो अपनी चालें खुद चलता है। चुनाव आपका है।

12. अस्वीकरण (Disclaimer)

अस्वीकरण (Disclaimer): यह सारांश Robert Greene की पुस्तक ’48 Laws of Power’ की हमारी व्याख्या और विश्लेषण है। इसका उद्देश्य मूल पुस्तक को प्रतिस्थापित करना नहीं है, बल्कि इसके मुख्य विचारों पर एक कहानी-आधारित परिप्रेक्ष्य प्रदान करना है। हम दृढ़ता से अनुशंसा करते हैं कि पाठक पूरी समझ और अनुभव के लिए मूल पुस्तक खरीदें। सभी कॉपीराइट मूल लेखक और प्रकाशक के हैं।

Additional Notes

  • और पढ़ें: “The Prince” by Niccolò Machiavelli, “Arthashastra” by Chanakya
  • समीक्षाएं: “यह किताब आपकी आंखें खोल देगी।”, “खतरनाक, लेकिन आवश्यक।”
  • खरीदें: [Purchase links]
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