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कितना प्रासंगिक है, हिंदी दिवस पर अयोध्या सिंह उपाध्याय "हरिऔध" का यह हिंदी भाषा पर काव्य पाठ ?

Updated: Sep 17, 2018

Amazingly beautiful and heart touching poems by Late shri Ayodhya Singh Upadhyaya "Harioudh" on greatness of beloved Hindi language


अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध को खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्यकार माना जाता हैI हरिऔध जी का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण ग्रंथ है - 'प्रियप्रवास' जिसे मंगला प्रसाद पुरस्कार प्राप्त हो चुका हैI हरिऔध, हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति रह चुके हैं और उन्हें विद्या-वाचस्पति पुरस्कार प्रधान किया जा चुका है I हरिऔध ने भगवान राम और कृष्ण के जीवन पर भी बड़ी ही मनोहारी कविताएं की हैI


अयोध्या प्रसाद का जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ के निजामाबाद में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित भोलनाथ उपाध्याय था और उनकी मां का नाम रुक्मिणी देवी था। उन्होंने सिख धर्म को अपना लिया और अपना नाम भोला सिंह में बदल दिया। उनके पूर्वजों को मुगलकालीन दरबारों में बड़ा ही सम्मान प्राप्त था । उनकी प्रारंभिक शिक्षा निजामाबाद और आजमगढ़ में हुई थी।


हरिऔध का जीवन काल 18565 से 1947 तक था, हरिऔध द्वारा हिंदी साहित्य में किए गए अविस्मरणीय योगदान के लिए उनको शत-शत नमन!

कितना प्रासंगिक है, आज हिंदी दिवस पर अयोध्या सिंह उपाध्याय " हरिऔध" का यह हिंदी भाषा पर काव्य-पाठ, ऐसा जान पड़ता है कि यह काव्य रचना अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने तब लिखी थी जब भारत की हिंदी भाषा जनसंख्या तकरीबन 21 करोड़ रही होगी I

पड़ने लगती है पियूष की शिर पर धारा। हो जाता है रुचिर ज्योति मय लोचन-तारा। बर बिनोद की लहर हृदय में है लहराती। कुछ बिजली सी दौड़